एक छोटे से गाँव में एक लड़का रहता था जिसका नाम रोहन था। वह अपने माता-पिता के साथ रहता था और उसके पिता एक छोटी सी दुकान चलाते थे। रोहन की माँ एक घरेलू महिला थीं जो अपने परिवार के लिए हमेशा तैयार रहती थीं।
रोहन की माँ बीमार थीं और उनका इलाज चल रहा था। रोहन अपनी माँ को बहुत प्यार करता था और उनकी सेहत के लिए बहुत चिंतित रहता था। वह हर दिन अपनी माँ के लिए प्रार्थना करता था और उनकी सेहत के लिए दुआ करता था।
एक दिन, रोहन की माँ की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई। रोहन ने अपने पिता के साथ मिलकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि उनकी माँ की जान बचाना मुश्किल है।
रोहन को यह बात सुनकर बहुत बड़ा धक्का लगा। वह अपनी माँ को खोने के बारे में सोच नहीं सकता था। वह अपनी माँ के साथ बिताए गए पलों को याद करने लगा और उनकी मुस्कराहट को याद करने लगा।
लेकिन अंत में, रोहन की माँ का निधन हो गया। रोहन को अपनी माँ के जाने का बहुत बड़ा दर्द हुआ। वह अपने पिता के साथ अकेला महसूस करने लगा। वह अपनी माँ की याद में रोने लगा और उनकी याद को अपने दिल में बसाने लगा।
रोहन के पिता ने उसे समझाने की कोशिश की कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और हमें हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने रोहन को बताया कि उसकी माँ ने उसे एक मजबूत और साहसी लड़का बनाने के लिए बहुत मेहनत की थी और अब वह उसे अपनी माँ की याद में जीने के लिए प्रेरित करना चाहते थे।
रोहन ने अपने पिता की बातों को समझा और अपनी माँ की याद में जीने का फैसला किया। उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने पिता की दुकान में भी मदद करने लगा। वह अपनी माँ की याद में एक छोटा सा पेड़ भी लगाया और उसकी देखभाल करने लगा।
निष्कर्ष:
रोहन की कहानी हमें यह सिखाती है कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपने प्रियजनों की याद में जीने के लिए प्रेरित करना चाहिए और उनकी याद को हमेशा अपने दिल में रखना चाहिए।